मौन मतदाताओं ने बढ़ाई धड़कन ,दोनों दल अपनी जीत पर वार्डों की बिठा रहे गणित ।
बाड़ाबंदी के जरिए सैरसपाटे पर निकले प्रत्याशी।
अध्यक्ष पद है अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित ।
बेगूं/चित्तौड़गढ़ । नगर पालिका चुनाव को लेकर करीब एक पखवाड़े से चल रही उहापोह की स्थिति तथा मतदाताओं के मन मनुहार का दौर बुधवार को मतदान समाप्ति के साथ ही थम गया था और अब अपने-अपने वार्ड में मतदान के प्रतिशत के साथ साथ हार जीत की गणित लगाने में उस वार्ड के सक्रिय कार्यकर्ता व बूथ प्रभारी लगाने में लग गए।
मतदान के प्रति आंकड़ों के अनुरूप नवयुवकों की कम भागीदारी सबसे बड़ा चुनाव में कारण माना जा रहा है कि आखिरकार निकाय चुनावो के प्रति युवा मतदाता की कम सक्रियता अच्छे संकेत नहीं है। हालांकि मतदान का प्रतिशत तो अच्छा रहा । लेकिन चुनाव उत्साहजनक नहीं रहा । वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर भाजपा के 35 वार्डों के प्रत्याशी एक जगह एकत्रित हो गए तथा बाड़ेबंदी के जरिए सैरसपाटे पर निकल गए, जो कि परिणाम के दिन उपखंड मुख्यालय पर पहुंचेंगे और इसके पश्चात जीते हुए प्रत्याशियों को लेकर पुनः बाड़ेबंदी में ले जाया जाएगा जो कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनावों तक इसी मंजर में रहेंगे, 35 वार्डो में से भाजपा के 5 प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके। हालांकि अभी तक फ़िलहाल कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों की कोई बाड़ेबंदी नहीं हुई है। भाजपा के लिए इस बार चुनावी रण में अध्यक्ष के दावेदारों के कई चेहरे है। ऐसे में संगठन के लिए जीत के बाद जिस तरह टिकटों के बंटवारे के समय जो स्थिति हुई थी। उसी तरह के हंगामे अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद में होने के पूरे आसार हैं, क्योंकि भाजपा अपने बोर्ड गठन को लेकर भी पूरी आश्वस्त है केवल सीटों को लेकर अलग अलग प्रयास लगाए जा रहे है। तो वही इस बार कांग्रेस के बड़े नेता भी चुनावी हवा व मतदाताओं की खामोशी को लेकर आशा की किरण देख रहे हैं कि जनता किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधने की आतुर है।
सूत्रों के अनुसार अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व नगरपालिका सीट पर यदि अन्य श्रेणी के प्रत्याशी को अध्यक्ष बनाया जाता है, तो कई न कई इसमें विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता । बाजार में चर्चा है कि यदि इस बार अन्य श्रेणी को प्रतिनिधित्व दिया जाता हे ,तो कई न कई भीतरखाने से भी विरोध की गंभीर स्थिति को देखा जा सकता है।









